उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।
Ecology Environment Topic Wise questions
उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।
Q22.मैदानी पारिस्थितिकी तंत्र का किस प्रकार का जीवभार (बायोमास) पिरामिड होता है?
वन एवं घास स्थल (मैदानी) पारिस्थितिकी तंत्र के जीव भार पिरामिड सीधे अथवा ऊपर की ओर बनेंगे क्योंकि दोनों तंत्रों के प्राथमिक उत्पादकों (क्रमश: वृक्ष एवं घास के पौधे) का भार विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ताओं के भार से अधिक होता है। दोनों पारिस्थितिक तंत्रों के पिरामिड में क्रमश: वृक्षों व घास के चौड़े आधार की ओर तथा विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ताओं के भार को ऊपर की ओर दिखलाया जायेगा।
Q23.सही खाद्य शृंखला को पहचानिए? घास →→→→खरगोश →→→→लोमड़ी
उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।
Q24.टैगा किस प्रकार के पारिस्थितिकी तंत्र का उदाहरण है?
टैगा, वन पारिस्थितिकी तंत्र का उदाहरण है। टैगा वन का विस्तार 500 से 700 उत्तरी अक्षाशों के मध्य है। यह एक विस्तृत पट्टी के रूप में कनाडा, नार्वे, फिनलैण्ड, स्वीडन, लिथुआनिया, लाटविया तथा साइबेरिया में फैले हुए हैं। यहां के वनस्पतियों में कोणधारी वृक्ष पाये जाते हैं। इन वनों के प्रमुख वृक्ष हैं- चीड़, स्प्रूस, फर, बर्च, पाइन आदि।
Q25.पारिस्थितिकी तंत्र में कितने प्रकार के पारिस्थितिकी पिरामिड होते हैं?
किसी भी पारिस्थितिकी तंत्र के प्राथमिक उत्पादकों एवं विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ताओं की संख्या, जीव भार तथा संचित ऊर्जा में परस्पर एक प्रकार का सम्बन्ध होता है। इन सम्बन्धोें को जब चित्र रूप में दिखलाया जाता है तो इन्हें पारिस्थितिकी पिरामिड कहते हैं। ये मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं- (1) जीव संख्या पिरामिड (2) जीवभार पिरामिड (3) संचित ऊर्जा का पिरामिड।
Q26.निम्नलिखित में से कौन सा मानव निर्मित पारिस्थितिकी तंत्र नहीं है?
मानव अपनी आवश्यकता की वस्तुओं, जैसे-भोजन, वस्तु, लकड़ी, औषधि तथा अन्य लाभदायक उत्पादों का अधिक से अधिक उत्पादन करने के लिए प्राकृतिक पर्यावरण में सुनियोजित फेर-बदल करता रहता है। फलस्वरूप नये पारिस्थितिक तंत्र का निर्माण होता है, जिसमें मनुष्य अधिक सलंग्न रहता है। ऐसे पारिस्थितिक तंत्र को मानव निर्मित पारिस्थितिक तंत्र कहते हैं। इसके उदाहरण हैं- उद्यान, घरेलू मछलीघर, वनस्पति-उद्यान आदि। जबकि घास का मैदान प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र है।
Q27.निम्नलिखित में से कौन परोपजीवी खाद्य शृंखला है?
परोपजीवी/परजीवी खाद्य श्रृंखला शाकाहारी जन्तुओं से शुरू होती है, किन्तु इसमें ऊर्जा का प्रवाह बड़े आकार के जन्तुओं से छोटे आकार वाले जन्तुओं की ओर होता है। अत: बड़े आकार के जन्तु पोषक एवं छोटे आकार वाले जन्तु जिनकी खाद्य संबंधी आवश्यकता पोषक द्वारा पूर्ण होती है, परजीवी कहलाते हैं। उपर्युक्त विकल्पों में परजीवी खाद्य श्रृंखला का उदाहरण है- वृक्ष → फल खाने वाले पक्षी → जूँ तथा कीड़े। ⇒ इसका पिरैमिड उल्टा बनता है।
किसी पारिस्थितिकी तंत्र में खाद्य श्रृंखला विभिन्न प्रकार के जीवधारियों का वह क्रम है जिसमें जीवधारी भोज्य एवं भक्षक के रूप में संबंधित रहते हैं। खाद्य श्रृंखला में जीवधारियों का क्रम है- चरागाह बायोम गरूण/बाज → उच्च मांसाहारी ↑ ↑ सॉँप → तृतीय श्रेणी के उपभोक्ता ↑ ↑ मेढ़क → द्वितीय श्रेणी के उपभोक्ता ↑ ↑ कीट → प्रथम श्रेणी के उपभोक्ता ↑ ↑ घास/पौधे → उत्पादक खाद्य शृंखला
जैविक शब्दावली में सहभोजिता अलग-अलग जाति के दो जीवों के बीच एक ऐसा संबंध (एक साथ रहने तथा भोजन करने इत्यादि) है जिसमें एक जाति के जीव को दूसरी जाति के जीव से लाभ होता है लेकिन दूसरी जाति के जीव को पहली जाति के जीव से ना ही कोई लाभ होता है और ना कोई हानि होती है अर्थात् दूसरी जाति का जीव सदैव अप्रभावित रहता है इसी प्रकार परजीविता अलग-अलग जाति के दो जीवों के बीच ऐसा संबंध (एक साथ रहने व भोजन करने आदि) है जिसमें एक जाति के जीव को दूसरी जाति के जीव से लाभ प्राप्त होता है जबकि दूसरी जाति के जीव को पहली जाति के जीव से हानि होती है।
Q30.किसी पारिस्थितिकी के निर्माण में शामिल होते हैं:
एक भौगोलिक इकाई में निवास करने वाले जीवों और उस इकाई के पर्यावरण के अन्तर्सम्बन्धों का समयबद्ध और क्रमबद्ध अध्ययन पारिस्थितिक तंत्र कहलाता है। S.जी. टांसले (1935) के अनुसार ‘वह तंत्र जिसमें पर्यावरण के समस्त जैविक और अजैविक कारक अन्त: संबंधित होते हैं, पारिस्थितिक तंत्र कहलाता है।
Q31.बड़े मांसाहारी या तृतीयक उपभोक्ता भोजन शृंखला के किस स्तर पर उपस्थित हैं?
एक जीव का ट्रॉफिक (पौष्टिकता) स्तर वह स्थिति है जो एक खाद्य शृंखला में व्याप्त है। एक खाद्य शृंखला उन जीवों का उत्तराधिकार है जो अन्य जीवों को खाते हैं और बदले में स्वयं खाए जाते हैं। एक खाद्य शृंखला पोषण स्तर 1 से शुरू होती है जैसे कि प्राथमिक उत्पाद पौधे, स्तर 2 पर शाकाहारी, 3 या उच्च स्तर पर मांसाहारी और आमतौर पर 4 या 5 शीर्ष शिकारियों के साथ समाप्त हो जाते हैं। अत: तृतीयक उपभोक्ता भोजन शृंखला 4 या 5 वें स्तर पर उपस्थित होता है।
Q32.निम्नलिखित में से कौन-सा एक प्राकृतिक पारितंत्र नहीं है?
वे पारितंत्र जो पूर्ण रूप से सौर विकिरण पर निर्भर रहते हैं ‘प्राकृतिक पारितंत्र’ कहलाते हैं। सौर ऊर्जा पर निर्भर वह पारितंत्र जो मनुष्य द्वारा निर्मित किये गये हैं ‘मानव निर्मित पारितंत्र’ कहलाते हैं। वन, तालाब तथा झील प्राकृतिक पारितंत्र तथा बगीचा व खेत मानव निर्मित (कृत्रिम) पारितंत्र हैं। वातावरण के जैविक एवं अजैविक घटकों की अंतर्क्रिया से विकसित तंत्र को ‘पारिस्थितिक तंत्र’ कहते हैं।
Q33.कौन से जीव प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से अपने निर्वाह हेतु उत्पादकों पर निर्भर करते हैं?
खाद्य शृंखला में उत्पादक, उपभोक्ता तथा अपघटक आते है। उत्पादक (पेड़ -पौधे) अपने भोजन का निर्माण स्वयं करते हैं। उपभोक्ता, उत्पादक से निर्मित भोज्य पदार्थ पर प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से निर्भर रहते हैं। उपभोक्ता के अन्तर्गत शाकाहारी एवं मांसाहारी दोनों प्रकार के जीव आते हैं जबकि अपघटक वे जीव हैं जो प्राय: उत्पादक तथा उपभोक्ताओं की मृत्यु के पश्चात उनके शरीर का अपघटन करते हैं।
Q34.निम्नलिखित में से कौन स्थलीय पारिस्थितिकी है?
झील, तालाब, नदी तथा सागर जलीय पारितंत्र का निर्माण करते हैं जबकि अर्द्ध शुष्क क्षेत्र, मैदान, वन आदि स्थलीय पारितंत्र का निर्माण करते है।
Q35.मानव प्रजाति इको प्रणाली की किस श्रेणी से संबंधित है?
सर्वाहारी ऐसे जानवरों को कहते हैं जो अपने आहार में वनस्पति (सब्जी, फल, अनाज) और मांस दोनों को शामिल करें। इन जीवों के खाने और हाजमें की प्रणाली किसी एक चीज के पालन के लिए नहीं बनी होती जैसे–शेर के चाकुओं जैसे दाँत और गाय के पेट घास पत्तों के लिए बिल्कुल ठीक होते हैं। सर्वाहारी नस्लों का विकास ऐसे वातावरण में हुआ है, जिसमें इन प्राणियों को जीवित रहने के लिए वह सब कुछ खाना पड़ता है जैसे–मनुष्य, कौवे, रैकून सर्वाहारी जीवों के उदाहरण है। मांसाहारी– इसके अंतर्गत सिंह, बाघ, चीता, सील, एवं लकड़बग्घा आदि जीव आते हैं। शाकाहारी– दुग्ध उत्पाद, फल, सब्जी, अनाज, बादाम आदि बीज सहित वनस्पति आधारित भोजन को शाकाहार कहते हैं। शाकाहारी व्यक्ति मांस नहीं खाता है। जूप्लेंकटन– जूप्लेंकटन एक श्रेणी है जिसमें छोटे प्रोटोजोन्स शामिल है। इसमें ‘‘होलाप्े लैंकटनिक’’ जीव शामिल हैं।
Q36.दिए गए क्षेत्र में पौधों और जानवरों दोनों में रहने वाले जीवों की कुल संख्या को क्या कहते है?
समस्त वनस्पतियों एवं प्राणियों के सम्मिलित रूप से सृजित पारिस्थितिक को जीवोम कहते है। अर्थात् जीवोम एक विस्तृत क्षेत्र में पाये जाने वाले समस्त पादपों तथा प्राणियों का बृहत पारिस्थितिक समुदाय है।
Q37.निम्नलिखित में से कौन उपभोक्ता के अन्तर्गत नहीं आता?
स्वपोषी वे जीव है जो साधारण अकार्बनिक अणुओं से जटिल कार्बनिक यौगिकों का निर्माण करते हैं। इस कार्य के लिए वे प्रकाश या रासायनिक ऊर्जा का उपयोग करते हैं। स्वपोषी जीवों को खाद्य शृंखला में उत्पादक कहा जाता है तथा यह (स्वपोषी) उपभोक्ता के अन्तर्गत नहीं आते हैं।
मृतपोषी पोषण में जीव मृत जन्तुओं और पौधों के शरीर से अपना भोजन अपने शरीर की सतह से घुलित (विलयन रूप) कार्बनिक पदार्थों के रूप में अवशोषित करते हैं। वैसे जीव जो अपना भोजन मृतजीवी पोषण द्वारा प्राप्त करते हैं मृतजीवी या सैप्रोफाइटस कहलाते हैं। मृतजीवी को अपघटक भी कहा जाता है क्योंकि ये जटिल अणुओं का विघटन करते हैं। जैसे-कवक, जीवाणु तथा कुछ प्रोटोजोआ में पोषण इसी विधि द्वारा होता है। 2. पर्यावरण संरक्षण
Q39.क्योटो प्रोटोकॉल नियमों के तहत छह प्रदूषकों में से एक निम्नलिखित में से कौन सा है?
क्योटो प्रोटोकॉल - यूएनएफसीसीसी (जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र का फ्रेमवर्क कन्वेंशन) का कॉप- 3, 11 दिसंबर 1997 में क्योटो, जापान में आयोजित हुआ था और 16 फरवरी 2005 को लागू हुआ था। यह व्यक्तिगत लक्ष्यों के अनुसार हरित गृह गैसों के उत्सर्जन को सीमित करने एवं कम करने के लिये कुछ प्रतिबद्धताओं को क्योटो प्रोटोकॉल के रूप में जाना जाता है। क्योटो प्रोटोकॉल की प्रथम प्रतिबद्धता अवधि के लक्ष्य छ: मुख्य ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को सम्मिलित करते है, जो निम्नलिखित है- ङ कार्बन डाईऑक्साइड (CO) 2 ङ मीथेन (CH) 4 ङ नाइट्रस ऑक्साइड (र् ध्) 2 ङ हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFC) ङ परफ्लोरोकार्बन (PFC) ङ सल्फर हेक्साफ्लोराइड (SF) 6
Q40.क्योटो प्रोटोकोल का संबंध किससे है?
उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।
Topics to cover next.
General practice
Topic-wise questions and study coverage will appear here.