Correct answer: ब्याज दरों पर ऊपर की ओर दबाव डाला जाएगा
Concept note यदि किसी अवधि में व्यय, प्राप्तियों से अधिक हो तो इसे घाटे की वित्त व्यवस्था या घाटे का बजट कहते है। घाटे की पूर्ति संचित कोषों से राशि निकाल कर या ऋण लेकर किया जाता है। इस स्थिति में ब्याज दरों पर ऊपर की ओर दबाव पड़ता है। क्योंकि यदि ऋण केन्द्रीय बैंक से लिया जाय तो मुद्रा का विस्तार होता है।
Concept note जब प्रस्ताव में मांग की राशि में रु.100 की कमी करने का प्रस्ताव होता है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य ऐसी विशिष्ट शिकायत को प्रकट करना होता है जो सरकार के उत्तरदायित्व के क्षेत्र में हो।
Concept note सरकार द्वारा मुख्यत: दो प्रकार के खर्च किए जाते हैं। विकास खर्च और गैर विकास खर्च। विकास खर्च को भी तीन मुख्य भागों में बाँटा जा सकता है– (i) आर्थिक सेवाओं पर खर्च, (ग्ग्) सामाजिक सेवाओं पर खर्च एवं (ग्ग्ग्) राज्यों को दी जाने वाली निधि जबकि सुरक्षा सम्बन्धित खर्च सरकार की गैर विकास खर्च की श्रेणी में आते हैं।
Concept note शून्य आधारित बजट इसे नई शुरुआत करना भी कहा जाता है। इसके तहत किसी विभाग या संगठन द्वारा प्रस्तावित खर्च की हर मद को बिल्कुल नई मद मानकर या आधार शून्य मानते हुए फिर से मूल्यांकन किया जाता है। इसमे गत वर्ष की घटनाओं का कोई औचित्य नहीं होता। केन्द्र सरकार द्वारा शून्य आधारित बजट 1987 से हर विभाग एवं मंत्रालयों में लागू किया गया। भारत में प्रथम बार वर्ष 1986 में वित्तमंत्री वी.पी. सिंह ने शून्य आधारित बजट स्वीकार किया था।
Concept note वित्त मंत्रालय में पांच विभाग है- (1) आर्थिक मामलों के विभाग (2) व्यय विभाग (3) राजस्व विभाग (4) विनिवेश विभाग (5) वित्तीय सेवाएँ। केन्द्रीय बजट तैयार करने और उसे संसद के सामने प्रस्तुत करने तथा राष्ट्रपति शासन वाली राज्य सरकारों एवं केन्द्रशासित क्षेत्रों के प्रशासन के लिए बजट तैयार करने का दायित्व आर्थिक मामलों के विभाग के पास है।
Concept note केन्द्रीय बजट 2019-20 के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था को वर्ष 2024-25 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमारे पास सिर्फ तीन वित्त वर्ष का समय है, इसका मतलब है कि इन चार वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था को बेहतर रफ्तार से वृद्धि करनी होगी।
Concept note बजट दस्तावेज में सकल राजस्व व्यय को योजनागत व्यय और गैर-योजनागत व्यय में विभक्त किया गया है। गैर-योजना व्यय के अन्तर्गत आते हैं- ब्याज-भुगतान, प्रतिरक्षा सेवाएँ, आर्थिक सहायता, प्रशासनिक सेवाएँ। जबकि योजनागत व्यय के अन्तर्गत केन्द्रीय योजना और राज्यों तथा केन्द्र प्रशासित प्रदेशों की योजनाओं के लिए दी गयी सहायता सम्मिलित है जैसे-कृषि, ग्रामीण, विकास, विद्युतीकरण, सिंचाई, बाढ़ नियत्रंण आदि।
Correct answer: कुल व्यय – (राजस्व प्राप्तियां ± गैर–ऋण से सृजित पूंजीगत प्राप्तियाँ)
Concept note राजकोषीय घाटा किसी एक वित्त वर्ष में राजस्व प्राप्तियों तथा अनुदान प्राप्तियों के ऊपर कुल सार्वजनिक व्यय का अन्तर है अर्थात– सकल राजकोषीय घाटा · कुल व्यय– (राजस्व प्राप्तियां ± गैर ऋण से सृजित पूंजीगत प्राप्तियां)
Concept note सरकार की कुल आय और कुल व्यय में अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है। राजकोषीय घाटा आमतौर पर राजस्व में कमी या पूंजीगत व्यय में अत्यधिक वृद्धि के कारण होता है। इसकी भरपाई आमतौर पर केन्द्रीय बैंक (रिजर्व बैंक) से उधार लेकर की जाती है या इसके लिए छोटी और लंबी अवधि के बॉण्ड के जरिये पूंजी बाजार से फण्ड जुटाया जाता है। भारतीय बजट में घाटे का सबसे बड़ा हिस्सा राजकोषीय घाटा है।
Concept note सार्वजनिक आय, व्यय, ऋण सम्बन्धी क्रियाओं तथा हीनार्थ प्रबन्धन से सम्बन्धित नीतियों को ही राजकोषीय नीति कहा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य आर्थिक स्थिरता तथा आर्थिक विकास सम्बन्धी कार्यक्रमों की सफलता में सहायक होने से सम्बन्धित है। राजकोषीय नीति के मुख्य घटक है- सरकारी व्यय, सार्वजनिक ऋण और कराधान (करारोपण)। ध्यातव्य है कि राजकोषीय नीति का निर्धारण सरकार की बजट नीति के अधीन होता है।
Concept note जब सरकार राजस्व प्राप्ति से अधिक व्यय करती है तो स्थिति को बजटीय घाटा या वित्त की कमी कहते है। अवमूल्यन में किसी देश की मुद्रा की विनिमय दर अन्य देशों की मुद्राओं से कम कर निर्यात को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है।
Concept note सार्वजनिक आय, सार्वजनिक व्यय, सार्वजनिक ऋण, करारोपण, बजट घाटे, सब्सिडी और हीनार्थ प्रबंधन या घाटे की वित्त व्यवस्था से संबंधित नीतियाँ ‘राजकोषीय नीति’ कहलाती है। करारोपण, सार्वजनिक व्यय तथा सार्वजनिक ऋण राजकोषीय नीति के प्रमुख घटक होते है। इस नीति का संचालन सरकार वित्त मंत्रालय के सहयोग से स्वयं करती है।
Concept note भारत का वित्त मंत्रालय भारत के आर्थिक सर्वेक्षण को प्रकाशित करता है। 31 जनवरी, 2021 को केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए आर्थिक समीक्षा संसद के समक्ष पेश की। बजट अगले साल का लेखा-जोखा होता है जबकि आर्थिक समीक्षा बीते वर्ष का विवरण होता है।
Correct answer: कीमतों पर कोई सीधा असर नहीं पड़ ता
Concept note राजकोषीय घाटा अधिक होने पर कीमतों पर सीधा असर नहीं पड़ता है। सरकार की कुल आय और व्यय के अन्तर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है और कुल आय से अधिक व्यय होने पर वह बाजार से ऋण लेती है। वहीं सरकार की राजस्व प्राप्ति और राजस्व व्यय के अंतर को राजस्व घाटा कहते है। इससे सरकार के मौजूदा खर्च और आमदनी का पता चलता है।
Concept note जिस स्थिति में सरकार का व्यय उसके राजस्व से अधिक हो जाता है, उसे बजट घाटा कहते हैं। इसमें किसी अवधि में व्यय, राजस्व प्राप्ति से अधिक हो तो उसे घाटे का बजट कहते हैं। भारत में बजट प्रणाली की शुरूआत वायसराय लॉर्ड कैनिंग ने की थी। भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 112 के अन्तर्गत प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए बजट पेश करने की व्यवस्था की गयी है। राष्ट्रपति द्वारा निर्देशित तिथि पर लोक सभा में वित्त मंत्री द्वारा बजट पेश किया जाता है। स्वतंत्र भारत का पहला आम बजट 26 नवम्बर, 1947 को स्वतंत्र भारत के पहले वित्तमंत्री आर.के. षणमुखम शेट्टी द्वारा पेश किया गया था।
Correct answer: निवल घरेलू ऋण–ग्रहण ± भारतीय रिजर्व बैंक से ऋण–ग्रहण ± विदेशों से ऋण–ग्रहण
Concept note सकल राजकोषीय घाटा, निवल घरेलू ऋण-ग्रहण ± भारतीय रिजर्व बैंक से ऋण ग्रहण ± विदेशों से ऋण ग्रहण के बराबर होता है। राजस्व प्राप्तियों और पूंजीगत प्राप्तियों की अपेक्षा कुल सरकारी व्यय का आधिक्य जिससे ऋण का सृजन नहीं होता सकल राजकोषीय घाटा कहलाता है।
Concept note उत्पादक क्षमता बढ़ाने वाले व्यय का सबसे मुख्य उदाहरण निवेश व्यय है। निवेश, आय का वह भाग है जो वास्तविक पूंजी निर्माण के लिए खर्च किया जाता है।
Correct answer: अतिरिक्त यूनिट की बिक्री पर प्राप्त राजस्व को
Concept note सीमांत से अभिप्राय एक अतिरिक्त से होता है। अत: अतिरिक्त यूनिट की बिक्री पर प्राप्त राजस्व सीमांत राजस्व कहा जाता है।
Syllabus roadmap
Topics to cover next.
01
General practice
Topic-wise questions and study coverage will appear here.
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