Concept note वायुमण्डलीय आर्द्रता में कमी होने के कारण वाष्पीकरण की दर में वृद्धि होती है। जबकि वायुमण्डलीय आर्द्रता में वृद्धि होने पर द्रव के वाष्पीकरण की दर में कमी होती है।
Concept note किसी पदार्थ के दबाव या तापमान में परिवर्तन के कारण पदार्थ की गैसीय अवस्था से द्रव अवस्था में परिवर्तन की प्रक्रिया को ‘संघनन’ कहा जाता है। यह दो कारकों पर निर्भर करता है। (1). तापमान में कमी (2). वायु की सापेक्ष आर्द्रता पर जलवाष्प की बूँदें जल के रूप में पृथ्वी पर गिरती हैं, तो उसे वर्षा कहते हैं। • वर्षा भी एक प्रकार का संघनन प्रक्रिया का उदाहरण है।
Concept note जल चक्र में हिम और बर्फ सीधे वाष्प में परिवर्तन हो जाते है इस प्रक्रिया को उर्ध्वपातन कहा जाता है। ऊर्ध्वपातन विधि द्वारा दो ऐसे ठोस के मिश्रण को अलग करते है, जिसमें एक ठोस ऊर्ध्वपातित हो, दूसरा नहीं। इस विधि से कपूर, नेफ्थ्लीन, अमोनियम क्लोराइड आदि को अलग करते है। (ग्ेर्) विलयन/(एदत्ल्ूग्दह)
Concept note किसी द्रव (विलयन) में घुले हुए ठोस को वाष्पीकरण की क्रिया के द्वारा अलग किया जाता है। किसी तत्व या यौगिक का द्रव अवस्था से गैस अवस्था में पारf वर्तन वाष्पीकरण कहलाता है। वाष्पीकरण किसी द्रव की सतह के कणों का उसकी गैसीय अवस्था में बदलने की प्रक्रिया है जिसमें द्रव गैसीय के रूप में बदल जाता है तथा द्रव (विलयन) में घुला ठोस बचा रह जाता है।
Concept note कोलाइड दो पदार्थ का विषमांग मिश्रण होता है। इसमें परिक्षेपित कणों का आकार 10 - 5 सेमी से 10 - 7 सेमी के बीच होता है। इनके कणों को नग्न आँखों से नहीं देखा जा सकता है। इसके कण छन्न पत्र के आर-पार जा सकते है। फोम, इमल्सन, साल, जेल इत्यादि द्रव में द्रव के कोलाइडी विलयन के उदाहरण है। दूध में वसा जलीय विलयन के रूप में घुला रहता है। अत: दूध एक पायस (Eस्ल्त्ेग्दह) है।
Concept note कोलाइड एक प्रकार का विषमांगी विलयन है, जिसमें विलेय कणों का आकार वास्तविक विलयन से बड़ा परन्तु निलम्बन से छोटा होता है। कोलाइड में विलेय कणों का आकार (या व्यास) 10 - 9 मीटर तथा 10 - 7 मीटर के मध्य होता है। द्रव का ठोस में कोलाइडल विलयन के उदाहरण है- पनीर, मक्खन तथा फलों की जैली। जबकि द्रव का द्रव में कोलाइडल विलयन का उदाहरण है- दूध, तेल का पानी में कोलाइडल विलयन।
Concept note समुद्री जल को एक विलयन के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। विलयन- दो या दो से अधिक पदार्थों के समांगी मिश्रण को विलयन कहा जाता है। जैसे- नमक तथा जल का मिश्रण, चीनी तथा जल का मिश्रण, ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन का मिश्रण आदि। 2. परमाणु संरचना (i) परमाणु और उसके मूल घटक (Atom and their Fundamental Components)
Concept note अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने स्वर्ण-पत्र प्रयोग के परिणामों को सन् 1911 में प्रकाशित किया जिससे यह पता चला कि परमाणु-नाभिक के केंन्द्र में स्थित दृढ़, सघन क्रोड के चलते प्रकीर्णन होता है।
Concept note परमाणु के तीन मौलिक कण होते हैं इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन व न्यूट्रॉन। न्यूट्रॉन एक ऐसा सूक्ष्म कण है, जिसका द्रव्यमान प्रोटॉन के द्रव्यमान से थोड़ा अधिक होता है लेकिन इस पर कोई आवेश नहीं होता है। न्यूट्रॉन एक उदासीन कण है। न्यूट्रान की खोज 1932 ई. में चैडविक ने की थी।
Concept note परमाणु किसी तत्व का वह छोटा से छोटा कण है जो किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में भाग ले सकता है परन्तु स्वतंत्र अवस्था में नहीं रह सकता है। परमाणु नाभिक के अंदर प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन स्थित होते हैं जबकि इलेक्ट्रॉन नाभिक के बाहर वृत्ताकार पथों पर चक्कर लगाता रहता है।
Concept note प्रोट्रॉन एक धनावेश युक्त मूल कण है जो परमाणु के नाभिक में न्यूट्रॉन के साथ पाया जाता है। इसका द्रव्यमान 1.672×10 - 27व्ु होता है जो इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान का लगभग 1837 गुना है। प्रोटॉन और न्यूट्रॉन दोनों का द्रव्यमान लगभग बराबर होता है। प्रोटॉन इकाई विद्युत आवेश युक्त होता है जबकि न्यूट्रॉन अनावेशित होता है। प्रोटॉन और न्यूट्रॉन दोनों से मिलकर नाभिक का निर्माण होता है। परमाणु का लगभग सारा द्रव्यमान नाभिक में समाहित होता है।
Concept note परमाणु के परिक्रमण एवं स्थायित्व की व्याख्या करते हुए रदरफोर्ड ने बताया कि, परमाणु सौरमण्डल की भाँति होते हैं। परमाणु में उपस्थित इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारो ओर वृत्ताकार पथों (कक्षाओं) पर ग्रहों के समान परिक्रमण करते हैं। इस वृत्ताकार पथों को कक्षाएँ कहते हैं तथा इलेक्ट्रॉन की गति कक्षीय गति होती है।
Concept note अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने अल्फा कणों को सोने की पतली पन्नी से टकराया था। इस प्रयोग के आधार पर रदरफोर्ड ने परमाणु का मॉडल प्रस्तुत किया। जिसके अन्तर्गत ‘‘किसी परमाणु के अंदर एक धनावेशित केन्द्रक होता है जिसे नाभिक कहते हैं। किसी परमाणु का लगभग सम्पूर्ण द्रव्यमान नाभिक के अन्दर निहित होता है। इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित कक्षाओं में परिक्रमा करते हैं।’’
Concept note एक परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या उस तत्व की परमाणु संख्या को प्रदर्शित करती है। दूसरों शब्दों में प्रत्येक तत्व का परमाणु क्रमांक यह दिखाता है कि उसके नाभिक में कितने प्रोटॉन है। आवर्त सारणी में दिए गये तत्वों की परमाणु संख्या यदि समान हो एवं परमाणु भार असमान हो तो उनको समस्थानिक (आइसोटोप) कहा जाता है, जबकि परमाणु भार समान एवं परमाणु क्रमांक अलग हो तो ऐसे तत्वों को समभारिक (आइसोबार) कहा जाता है।
Concept note इलेक्ट्रॉन की खोज जे.जे. थॉमसन (1897) ने किया था। इलेक्ट्रॉन वैद्युत आवेश युक्त मूलभूत उपपरमाणविक कण है यह परमाणु के नाभिक के चारों ओर चक्कर लगाता है। इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान 9.109×10-31 किग्रा होता है और इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान 1 प्रोटॉन के द्रव्यमान का लगभग गुना होता है, किसी भी 1837 परमाणु में प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन की संख्या बराबर होती है अर्थात् परमाणु की सामान्य अवस्था में जितने प्रोटॉन होते हैं उतने ही इलेक्ट्रॉन होते हैं। इलेक्ट्रॉन पर ऋणात्मक आवेश माना जाता है। 1 इलेक्ट्रॉन पर 1.6×10-19 कूलॉम ऋण आवेश होता है।
Concept note हाइड्रोजन आवर्त सारणी का प्रथम तत्व है। इसका परमाणु क्रमांक 1 व परमाणु भार 1.008 है। इसका प्रतीक प् है। इसके नाभिक में केवल एक प्रोट्रॉन होता है। इसके नाभिक में न्यूट्रॉन अनुपस्थित होता है। हाइड्रोजन के परमाणु अकेले नहीं पाये जाते अर्थात् यह द्विपरमाणुक है। यह प् अणु के रूप में पाया जाता है। (ग्ग्) क्वांटम संख्या
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Topics to cover next.
01
General practice
Topic-wise questions and study coverage will appear here.
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