Concept note भारतीय संविधान में निहित शक्तियों का सिद्धांत कनाडा के संविधान से लिया गया है। यद्यपि ‘निहित शक्तियों के सिद्धांत’ का सर्वप्रथम आविर्भाव संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से हुआ है। ‘निहित शक्तियों के सिद्धांत’ को ‘अवशिष्ट विषय’ के रूप में परिभाषित किया गया है जिसका अभिप्राय यह है कि कालान्तर में यदि कोई नवीन विषय उभरकर सामने आता है तो उसे ‘अवशिष्ट विषय’ की सूची में रखा जायेगा जिस पर कानून बनाने का अधिकार केवल संघ को होगा। कनाडा में भी इस प्रकार के विषय पर कानून बनाने का अधिकार केवल संघ को है।
Concept note संसदीय विशेषाधिकार मूलत: ऐसे अधिकार हैं, जो प्रत्येक सदन को सामूहिक और सदन के सभी सदस्यों को व्यक्तिगत रूप से प्राप्त होते हैं। इस तरह संसदीय विशेषाधिकार संसद के अनिवार्य अंग के रूप में होते हैं। संसदीय विशेषाधिकार का मूलभाव संसद की गरिमा, स्वतंत्रता और स्वायत्तता की सुरक्षा करना है। संसदीय विशेषाधिकार ‘ब्रिटेन’ के संविधान से लिया गया है।
Concept note भारतीय संविधान में अनुच्छेद 93 के तहत लोकसभा का अध्यक्ष व उपाध्यक्ष तथा अनुच्छेद 89 के तहत राज्यसभा के सभापति और उपसभापति का प्रावधान है। विधायिका में अध्यक्ष पद का प्रावधान ब्रिटेन के संविधान से ग्रहण किया गया है परन्तु दोनों के प्रावधानों में अंतर है। ब्रिटेन में विधायिका के अध्यक्ष को आवश्यक रूप से किसी दल का सदस्य नहीं होना चाहिए। ऐसी परंपरा है कि अध्यक्ष को अपने दल से त्यागपत्र देना पड़ता है और वह राजनीतिक रूप से तटस्थ रहता है। भारत में अध्यक्ष अपने दल की सदस्यता नहीं त्यागता है। विधायिका में अध्यक्ष अपने सदन के प्रतिनिधियों का मुखिया होता है और सदस्यों की शक्तियों व विशेषाधिकारों का संरक्षक होता है।
Concept note कनाडा के संविधान से सशक्त केन्द्र के साथ संघीय व्यवस्था, (अर्द्ध संघात्मक स्वरूप), अवशिष्ट शक्तियों का सिद्धान्त, केन्द्र द्वारा राज्य के राज्यपालों की नियुक्ति और उच्चतम न्यायालय का परामर्शी न्याय निर्णयन लिया गया है।
Concept note जनहित याचिका की अवधारणा अमेरिका में 1960 के दशक में उत्पन्न हुई थी। वास्तव में जनहित याचिका सार्वजनिक हित की रक्षा के लिए दायर किया गया मुकदमा है। इसमें यह आवश्यक नहीं की पीडि़ त पक्ष स्वयं अदालत जाए। यह किसी भी नागरिक या स्वयं न्यायालय द्वारा पीडि़त के पक्ष में मुकदमा दायर कर सकता है। भारत में जनहित याचिका की शुरुआत का श्रेय न्यायाधीश ‘वी. आर. कृष्णा अय्यर एवं पी. एन. भगवती’ को जाता है।
Concept note संयुक्त राज्य अमेरिका में न्यायिक समीक्षा प्रणाली का उद्भव हुआ था। वर्ष 1803 में मारबरी बनाम मेडिसन वाद में न्यायमूर्ति जान मार्शल ने न्यायिक समीक्षा की अवधारणा प्रतिपादित की। भारतीय उच्चतम न्यायालय में भी न्यायिक समीक्षा की शक्ति निहित है। इसके तहत वह केन्द्र व राज्य दोनों स्तरों पर विधायी व कार्यकारी आदेशों की संवैधानिकता की जांच कर सकता है। इन्हें अधिकारातीत पाये जाने पर इन्हें अ-विधिक, असंवैधानिक और अवैध घोषित कर सकता है, तदुपरांत इन्हें सरकार द्वारा लागू नहीं किया जा सकता।
Concept note संविधान किसी देश की राजनीतिक व्यवस्था का ढांचा निर्धारित करता है, जिसके अन्तर्गत वहाँ की जनता शासित होती है। संविधान की संकल्पना का उद्भव सर्वप्रथम 1215 ई. में ब्रिटेन में हुआ। ध्यातव्य है कि संविधान को दो वर्गों में विभाजित किया जाता है-लिखित संविधान एवं अलिखित संविधान। लिखित संविधान वाले देश हैं- भारत, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका आदि। जबकि अलिखित संविधान वाले देश हैं-ब्रिटेन, इजरायल, न्यूजीलैण्ड।
Concept note संविधान की चौथी अनुसूची में राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों को राज्यसभा में सीटों के आवंटन के बारे में प्रावधान है। पहली अनुसूची में राज्यों के नाम और उनके क्षेत्रीय अधिकार और केन्द्रशासित प्रदेशों के नाम और उनकी सीमा के लिये प्रावधान है।
Concept note भारतीय संविधान के भाग 20 का अनुच्छेद 368 संसद को संविधान तथा इसकी प्रक्रियाओं को संशोधित करने की शक्तियाँ प्रदान करता है। अनुच्छेद 368 में वर्णित प्रक्रिया के अनुसार संसद संविधान में नये उपबन्ध जोड़कर या किसी उपबन्ध को हटाकर या बदलकर संविधान में संशोधन करती है। हालाँकि संसद संविधान के मूल ढाँचे से जुड़े प्रावधानों में संशोधन नहीं कर सकती है।
Concept note भारतीय संविधान में कुल 12 अनुसूचियों का वर्णन हैं, जिसमें संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाओं को सूचिबद्ध किया गया है जिसमें से सिंधी, नेपाली, संथाली तथा अन्य 19 भाषाओं को शामिल किया गया है, जबकि भोजपुरी को 8वीं अनुसूची की 22 भाषाओं के अन्तर्गत सम्मलित नहीं किया गया है। गौरतलब है कि प्रारम्भ में संविधान की आठवीं अनुसूची में 14 भाषाएँ ही सूचीबद्ध थी, परन्तु वर्तमान में 22 भाषाएँ सूचीबद्ध है।
Concept note भारतीय संविधान की 11वीं अनुसूची को 73वें संविधान संशोधन अधिनियम 1992 के द्वारा में जोड़ा गया। इस अनुसूची में 29 विषय शामिल है। इस अनुसूची में पंचायत की शक्तियाँ, ग्रामीण आवासन, गरीबी उन्मूलन, बाजार, सड़क, पीने का पानी, स्वास्थ्य और स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है।
Concept note भारत के संविधान के भाग 13 में अनुच्छेद 301 से 307 तक भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर व्यापार, वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता का प्रावधान है। अनुच्छेद 301 यह घोषणा करता है कि भारत के पूरे क्षेत्र में व्यापार, वाणिज्य मुक्त होंगे। इसका उद्देश्य राज्यों के बीच सीमा बाधाओं को तोड़ ना है और देश में व्यापार और वाणिज्य को प्रोत्साहित करने के लिए एक इकाई का निर्माण करना है।
Concept note संविधान के भाग-XI में अनुच्छेद 245 से 263 तक केन्द्र राज्य विधायी संबंधों की चर्चा की गई है। इसके अतिरिक्त कुछ अन्य अनुच्छेद भी इस विषय से संबंधित है। संविधान के अनुच्छेद 245 में कहा गया है कि, संविधान के उपबंधों के अधीन रहते हुये संसद भारत के संपूर्ण राज्य क्षेत्र अथवा उसके किसी भाग के लिए विधि बना सकेगी तथा किसी राज्य का विधान मण्डल उस संपूर्ण राज्य अथवा किसी भाग के लिये विधि बना सकेगा।
Concept note भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत ‘पुलिस’ और ‘लोक व्यवस्था’ राज्य के विषय है और अपराध रोकने, पता लगाने, जाँच पड़ताल करने तथा अपराधियों के विरुद्ध अभियोजन चलाने की मुख्य जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। सातवीं अनुसूची राज्यों और संघ के मध्य के अधिकारों को उल्लेखित करता है।
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