Concept note ‘पोनंग लोक नृत्य’ अरुणाचल प्रदेश राज्य से सम्बंधित है। इस नृत्य में महिलायें एक विशेष परिधान में नृत्य करती हैं। भारत के प्रमुख लोक नृत्य – राज्य मणिपुरी, राखाल, नटरास मणिपुर बिछू, बिछुआ, झुमुरा होएजानाई असोम डफ, डंडानाच, छपेली, नटी, चम्बा हिमाचल प्रदेश
Concept note ‘भवई’ मुख्यत: उत्तरी राजस्थान और गुजरात राज्य के जनजातीय महिलाओं द्वारा किया जाने वाला एक पारंपरिक लोकनृत्य है। इसमें महिला नर्तकियाँ अपने सिर पर पीतल के सात से नौ घड़ों को रखकर नृत्य करती हैं।
Concept note पश्चिम बंगाल के स्थानीय शिल्पकारों को पौष मेले में अपने लोक नृत्य, संगीत, भोजन और संस्कृति को प्रदर्शित करते हुए देखा जा सकता है। यह मेला वीरभूमि जिले के शांति निकेतन में आयोजित किया जाता है।
Concept note महाभारत कालीन खेल नृत्य ‘थोडा’ का संबंध हिमाचल प्रदेश से है। कौरव-पांडव युद्ध से प्रेरित यह खेल नृत्य बिशु मेला के अवसर पर शाठी तथा पाशी समुदाय द्वारा खेला जाता है। यह खेल हिमाचल प्रदेश के शिमला, सिरमौर, सोलन, कुल्लू तथा उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र में आयोजित किया जाता है।
Concept note कुचिपुड़ी नृत्य का संबंध आंध्र प्रदेश से है। आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिलें में कुचीपुड़ी नामक गाँव है, यहाँ के तेलुगू वैष्णव कवि सिद्धेन्द्र योगी ने यक्षगान के रूप में कुचीपुड़ी शैली की कल्पना की थी। कुचीपुड़ी में स्त्री-पुरुष दोनों नर्तक भाग लेते हैं और कृष्ण लीला की प्रस्तुति करते हैं। इस नृत्य में पानी भरे मटके को अपने सिर पर रखकर पीतल की थाली में नृत्य करना बेहद लोकप्रिय है।
Concept note उपर्युक्त में से चप्पेली केरल का लोकनृत्य नहीं है। यह उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकनृत्य शैली हैं। इसे स्त्री तथा पुरुष दोनों मिलकर करते है। नाचते हुए स्त्री के हाथों में आइना तथा रुमाल एवं पुरुष के हाथों में खंजर होता है। शेष सभी दिए गए नृत्य केरल से संबंधित हैं।
Concept note ‘बिहू’ असम का लोकनृत्य है जो खुशी के अवसर पर एवं बिहू त्योहार के उपलक्ष्य में, असम राज्य के युवा पुरुषों और महिलाओं दोनों द्वारा किया जाता है। इसकी विशेषता फुर्तीली नृत्य मुद्राएँ, हाथों की तीव्र गति है। नर्तक इस नृत्य को करते समय पारंपरिक रंगीन आसामी पारिधान पहनतें है जबकि लावणी– महाराष्ट्र, ओडिशी–ओडिशा एवं चोलिया–उत्तराखण्ड राज्य का प्रमुख लोकनृत्य है।
Concept note मोहिनीअट्टम भारत के केरल राज्य में प्रचलित शास्त्रीय नृत्य की शैली है। मोहिनीअट्टम भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार के नाम पर पड़ा है। यह महिलाओं द्वारा व्यापक प्रशिक्षण के पश्चात् किया जाने वाला परम्परागत एकल नृत्य है। केरल का एक अन्य शास्त्रीय नृत्य कथकली भी है।
Concept note कर्मा नृत्य छत्तीसगढ़ अंचल के आदिवासी समाज का प्रचलित लोकनृत्य है, जो कर्मा जनजातियों द्वारा नई फसल के आने की खुशी में किया जाता है। यह नृत्य, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा ओड़ीशा एवं बिहार के कुछ हिस्सों में बसे कर्मा आदिवासियों द्वारा भी मनाया जाता है।
Concept note सत्रिया नृत्य असम का शास्त्रीय नृत्य है, जिस वर्ष 2000 में भारत के आठ शास्त्रीय नृत्यों में शामिल होने का गौरव प्राप्त हुआ। इस नृत्य के संस्थापक महान संत श्री शकंर देव हैं।
Concept note ‘वजिरी नृत्य’, पश्तून जनजाति का पारम्परिक नृत्य है।यह नृत्य पाकिस्तान के वजीरिस्तान क्षेत्र में लोकप्रिय है। पश्तूनों की अधिकतम जनसंख्या पाकिस्तान, अफगानिस्तान तथा भारत में पायी जाती है।
Concept note मूनवॉक नृत्य एक नृत्य चाल है जिसमें नर्तक पीछे की ओर भागता है लेकिन उसके शरीर की क्रियाएं आगे की ओर गति का सुझाव देती हैं, पहले इसे ब्लैकस्लाइड के रूप में जाना जाता था यह एक पापिंग चाल है, यह नृत्य माइकल जैक्सन से संबंधित है।
Concept note ‘धाप नृत्य’ ओड़ीशा का एक लोकनृत्य है जो कंधा जनजाति द्वारा किया जाता है। इस नृत्य में महिला और पुरूष दोनों भाग लेते हैं। धाप नृत्य मुख्य रूप से विवाह समारोह के दौरान किया जाता है। घमुरा, पाला, डस्कथिया, दल्खाई, छाऊ आदि ओड़ीशा के लोकनृत्य हैं।
Concept note कालबेलिया नृत्य राजस्थान के प्रसिद्ध लोकनृत्य में से एक है यह नृत्य सपेरा जाति के द्वारा किया जाता है। इसमें स्त्रियाँ ही भाग लेती हैं प्रसिद्ध लोक नर्तकी गुलाबो ने इस नृत्य को देश- विदेश में बहुत नाम दिलाया। ध्यातव्य है कि इस नृत्य को शास्त्रीय नृत्य का दर्जा नहीं प्राप्त है। कथक, कथकली तथा ओडिसी शास्त्रीय नृत्य है।
Concept note ओट्टंथुल्लल नृत्य केरल का मलयालम भाषी नृत्य है 18वीं सदी में कुंचन नंबियार के द्वारा यह अस्तित्व में लाया गया था। वे मलयालम भाषा के तीन प्रमुख कवियों में से एक थे। यह नृत्य मृदंग तथा इडक्का वाद्ययंत्रों के साथ किया जाता है।
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