Concept note कोणार्क नृत्य महोत्सव सूर्य मंदिर की पृष्ठभूमि में एक ओपन एयर ऑडिटोरियम में आयोजित किया जाता है, जिसे ब्लैक पैगोडा के नाम से भी जाना जाता है।
Concept note सत्रिया नृत्य, आठ मुख्य भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपराओं में से एक है। यह नृत्य असम का शास्त्रीय नृत्य है। इस नृत्य के संस्थापक महान संत शंकरदेव है। • छऊ एक लोक नृत्य है जो पश्चिम बंगाल (पुरुलिया छऊ), ओडिशा (मयूरभंज छऊ) तथा झारखण्ड (सरायकेला छऊ) राज्य में प्रचलित है।
Concept note ‘छऊ’ एक लोक नृत्य नाटिका है जो बंगाल, ओडिशा एवं झारखण्ड में प्रचलित है। इन राज्यों में यह नृत्य वार्षिक सूर्य पूजा के अवसर पर किया जाता है। इस नृत्य में रामायण, महाभारत तथा पुराणों में वर्णित अलग-अलग घटनाओं को आधार बनाकर नृत्य किया जाता है। ‘छऊ’ लोकनृत्य को यूनेस्को की अमूर्त विरासत सूची में शामिल किया गया है।
Concept note ‘यमपुरी’ बिहार का प्रसिद्ध पारम्परिक छड़ पुतली नृत्य है। यमपुरी नृत्य में यमराज एवं चित्रगुप्त के मध्य संवाद का प्रदर्शन होता है। विदित है कि छड़ पुतली वैसे तो दस्ताना पुतली का ही अगला चरण है, लेकिन यह उससे काफी बड़ी होती है तथा नीचे स्थित छड़ों पर स्थित होती है। बंगाल का पुत्तल नाच एवं बिहार का यमपुरी नृत्य, छड़ पुतली के प्रमुख उदाहरण हैं।
Concept note ‘यक्षगान’ कर्नाटक राज्य का पारंपरिक लोकनृत्य एवं नाट्य रूप है। कर्नाटक में यक्षगान की परंपरा लगभग 800 वर्षों पुरानी मानी जाती है। यक्षगान भगवान गणेश की वंदना से शुरू होता है।
Concept note ढिमसा (हेमसा) आंध्र प्रदेश का पारम्परिक लोक नृत्य है। यह नृत्य प्रदेश के विशाखापट्टनम जिले में प्रचलित है। यह एक जनजातीय नृत्य है जो विवाह के समय एवं शिकार के अवसर पर किया जाता है। इस लोक नृत्य में महिला एवं पुरुष दोनों भाग ले सकते हैं।
Concept note बेहदींखलम मेघालय का पारम्परिक लोक नृत्य है जो मुख्यत: वहाँ की जयंतिया जनजाति द्वारा किया जाता है। यह प्रतिवर्ष जुलाई महीना में बुआई के अवसर पर मनाया जाता है।
Concept note ओडिशा अपनी सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध है। भारत में ओडिशा राज्य का एक प्रसिद्ध कठपुतली नृत्य कांधी/ कानढेई या सखी नाटा है। यह एक दुर्लभ और अलग प्रकार की शैली और विविधता के साथ किया जाने वाला एक अनूठा नृत्य है।
Concept note शोंडोल नृत्य– इसे लद्दाख के शाही नृत्य के रूप में जाना जाता है। इसे तक्षोमा या महिला नर्तकों द्वारा विशेष अवसर पर लद्दाख के राजा की प्रशंसा करने के लिए प्रस्तुत किया जाता है। जबरो नृत्य– लद्दाख क्षेत्र के चांग यांग और रोंग इलाकों में तिब्बती मूल के खानाबदोष लोगों द्वारा पक्तियाँ बना कर इस नृत्य को किया जाता है। यॉक नृत्य– यह बौद्ध जनजातियों के महायान संप्रदाय का प्रमुख नृत्य है। इसमें लोग यॉक की वेशभूषा धारण कर नृत्य करते हैं। यह भारत के अरूणाचल प्रदेश में मुख्य रूप से किया जाता है।
Concept note यूनेस्कों ने 2010 में मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में कालबेलिया लोक गीतों और नृत्यों को अंकित किया है। यह राजस्थान के कालबेलिया जनजाति की महिलाओं द्वारा किया जाने वाला लोक नृत्य है। ⇒ डालखाई पश्चिमी उड़ीसा का सबसे लोकप्रिय लोक नृत्य है।
Concept note लूर नृत्य एक पारंपरिक लोक नृत्य है जिसे हरियाणा राज्य में केवल महिलाओं द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। हरियाणा के बांगर क्षेत्र में यह नृत्य सुखद बसंत ऋतु के आगमन व रबी की फसलों की बुआई के समय केवल महिलाओं द्वारा किया जाता है। लूर नृत्य को राजस्थान में भी महिलाओं द्वारा उल्लास पूर्वक एक बड़े घेरे में किया जाता है। यह राजस्थान के मारवाड़ का भी लोक नृत्य है। हरियाणा के अन्य प्रमुख लोकनृत्य हैं-धमाल नृत्य, घोड़ा- घोड़ी नृत्य, फाग नृत्य, सांग नृत्य, छठ नृत्य व डफ नृत्य आदि।
Concept note कडसा झारखंड का एक प्रसिद्ध लोक नृत्य है। इस नृत्य को करते समय महिलाएँ अपने कंधे या सिर पर ‘कलश’ (मिट्टी का बर्तन) लिए रहती हैं। इस नृत्य में आमतौर पर पुरुष शामिल नहीं होते हैं।
Concept note ‘कथक नृत्य’ उत्तर प्रदेश का शास्त्रीय नृत्य है। यह हिन्दू और मुस्लिम दोनों कलाकारों द्वारा किया जाता है। मध्यकाल में कथक का सम्बन्ध कृष्ण कथा और नृत्य से था। मुसलमानों के काल में यह दरबार में भी किया जाने लगा वर्तमान समय में ‘बिरजू महाराज’ कथक के प्रसिद्ध कलाकार है।
Concept note राज्य नृत्य मिजोरम खल्लम, चैलम, थंगलाम सिक्किम सिकमारी, खूखूरी नृत्य जम्मू और कश्मीर राउफ, मंदजाल गोवा कुणवी नृत्य, गोंफ
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