Concept note घूमर, राजस्थान का एक पारम्परिक लोक नृत्य है। यह भील जनजातियों द्वारा देवी सरस्वती की पूजा के लिए किया जाता था। जिसे बाद में अन्य राजस्थानी समुदायों द्वारा किया जाने लगा। इसका प्रदर्शन करते समय नर्तक दक्षिणावर्त और वामावर्त कदमों के साथ एक गोलाकार दिशा में चलते हैं और बीच-बीच में ताली भी बजाते हैं।
Concept note भारत के विभिन्न राज्यों से सम्बंधित लोकनृत्य तेलंगाना - लबाडी, पेरिनी सिवाटडवम छोलिया - सिवादांडवम् उत्तर प्रदेश - रासलीला, नौटंकी उत्तराखण्ड - गढ़वाली, छलिया ओडिशा - घमुरा, छऊ पाला
Concept note लावणी, महाराष्ट्र राज्य का एक प्रसिद्ध लोक-नृत्य है, जिसकी शुरूआत 18वीं और 19वीं शताब्दी में हुई थी। लावणी पारंपरिक गीत और नृत्य का संयोजन है, जो विशेष रूप से ताल, वाद्य,ढ़ोलकी की थाप पर किया जाता है। लावणी नृत्य दो प्रकार का होता है- (1) निर्गुणी लावणी (2) शृंगारी लावणी
Concept note राज्य लोकनृत्य कर्नाटक यक्षगान, कुनीता, वीरगास्से, कामसले, कर्गा गोवा दकनी, खोल झगौर, मांडी असम कली गोपाल, खेल गोपाल, बिहू, राखल, नटपूजा, बिहुआ गुजरात गरबा, लास्य, भवई, गणपतिभजन, डांडिया
Concept note खुआंगचावी नामक एक विशेष अवसर के दौरान, मिजोरम के स्थानीय कलाकारों द्वारा खुल्लम नृत्य किया जाता है। खुल्लम शब्द का अर्थ मेहमानों का नृत्य है। प्रदर्शन देखने के लिये आमंत्रित लोगो को अक्सर संबंधित स्थल के अन्दर आते समय नृत्य करते देखा जाता है। पुंडम पारम्परिक पोशाक है, जिसे खुल्लम नर्तकियों द्वारा पहना जाता है, मिजोरम के खुल्लम नृत्य से जुड़ा एक और दिलचस्प तथ्य यह है कि इसमें किसी भी तरह का मुखर गीत शामिल नही है।
Concept note ख्याल राजस्थान का लोक-नाट्य नृत्य है। यह राजस्थान की भवाई जनजाति द्वारा किया जाता है। आमतौर पर ख्याल का विषय पौराणिक कहानी या प्राचीन प्रकरण होता है। इसके कुछ प्रकार निम्न है- • कुचामनी ख्याल • शेखावाटी ख्याल • जयपुरी ख्याल • अलीबाक्षी ख्याल ख्याल भारतीय तथा फारसी संस्कृति का मिश्रण है।
Concept note अलकप एक लोकप्रिय और बंगाल की सबसे पुरानी नृत्य शैली है जो 19वीं सदी में शुरु हुई थी। यह नृत्य, गायन, नाटक आदि के मेल से पूर्ण होता है। लाठी, छऊ, संथाल, गंभीरा आदि पश्चिम बंगाल के प्रमुख नृत्य है।
Concept note कालबेलिया नृत्य तथा गीत कालबेलिया समुदाय के पारम्परिक जीवन शैली की एक अभिव्यक्ति है। यह इसी नाम की एक राजस्थानी जनजाति से संबंधित है। इसे वर्ष 2010 में संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (ICH) की सूची में शामिल किया गया था। यह केवल महिलाओं द्वारा प्रस्तुत किया जाता है, जबकि पुरुष वाद्य यंत्र बजाते है और संगीत प्रदान करते है।
Concept note कथक नृत्य के मशहूर प्रतिनिध बिरजू महाराज लखनऊ के कालका बिंदादीन घराना से संबंध रखते है। इनका जन्म 4 फरवरी, 1938 को लखनऊ में हुआ था। इन्हें 1983 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। गौरतलब है कि 2012 में ‘विश्वरूपम’ फिल्म में कोरियोग्राफी के लिए इन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से भी सम्मानित किया था। तथा वर्ष 2016 में बाजीराव मस्तानी के ‘मोहे रंग दो लाल’ गाने की कोरियोग्राफी के लिए फिल्म फेयर पुरस्कार भी मिला था।
Concept note गुरु मायाधर राउत एक भारतीय शास्त्रीय ओडिसी नर्तक, कोरियोग्राफर और गुरु हैं। इन्हें 1985 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार तथा 2010 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
Concept note केलुचरण महापात्र (1926-2004) एक प्रसिद्ध भारतीय शास्त्रीय नर्तक, गुरु और ओडिशी नृत्य के प्रतिपादक थे। उनकों संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 1966, पद्म श्री 1974, पद्म भूषण, 1988 तथा पद्म विभूषण 2000 में सम्मानित किया गया था।
Concept note वेम्पति चित्रा सत्यम् (15 अक्टूबर 1929-29 जून 2012) एक भारतीय नर्तक और कुचिपुड़ी (आंध्रप्रदेश) नृत्य शैली के गुरु थे। इनका जन्म आंध्रप्रदेश के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उन्हें भारत सरकार द्वारा 1998 में पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया।
Concept note बारीक नक्काशीदार रॉक मूर्तियों के साथ एक विशाल वास्तुकला अर्जुन तपस्या बंगाल की खाड़ी की पृष्ठभूमि में ममल्लापुरम नृत्य महोत्सव के लिए एक स्थल है।
Concept note पंडित सुंदर प्रसाद भारतीय शास्त्रीय नृत्य, कथक के जयपुर घराने के गुरु (शिक्षक) थे। उन्हें 1959 में संगीत नाटक अकादमी द्वारा कथक नृत्य क्षेत्र में उन्हें आजीवन योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
Concept note सत्रिया नृत्य आठ मुख्य भारतीय शास्त्रीय नृत्य परम्पराओं में से एक है। इस नृत्य के संस्थापक भी मंत शंकरदेव है, यह असम का शास्त्रीय नृत्य है।
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