भारत सरकार के पर्यावरण और वन मंत्रालय के तहत एक वैधानिक स्वायत्त निकाय, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की स्थापना वर्ष 2003 में हुई थी। इसकी स्थापना जैवविविधता एक्ट- 2002 के तहत की गई है।
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भारत सरकार के पर्यावरण और वन मंत्रालय के तहत एक वैधानिक स्वायत्त निकाय, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की स्थापना वर्ष 2003 में हुई थी। इसकी स्थापना जैवविविधता एक्ट- 2002 के तहत की गई है।
1869 में, अर्न्स्ट हेकेल एक नए शब्द ‘ओकोलॉजी (धम्दत्दुग)’ का प्रतिपादन किया, जो जीवों के उनके पर्यावरण के साथ संबंधों के अध्ययन को परिभाषित करता है।
Q03.‘‘इकोलॉजी’’ शब्द की रचना किसने की थी?
उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।
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पादक प्लवक (फाइटोप्लैंक्टन), शैवाल, छोटे जलीय जीव खाद्य जाल के आधार माने जाते हैं। वे प्राथमिक उपभोक्ताओं जैसे जंतुप्लवक, छोटी मछली, क्रस्टेशियंस द्वारा खाए जाते है।
Q06.इनमें से कौन भू-संसाधनों के उत्पादक और उपभोक्ता हैं?
भू-संसाधनों को एक सेवा या अन्य सम्पत्ति के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसका उपयोग उन वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करने के लिए किया जाता है जो मानव की जरूरतों और इच्छाओं को पूरा करती हैं। संसाधनों को आम तौर पर प्राकृतिक एवं मानव निर्मित में वर्गीकृत किया जाता है।
Q07.निम्नलिखित में से कौन-सा एक प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र (इको सिस्टम) है?
किसी स्थान पर पाये जाने वाले किसी जीव समुदाय का वातावरण से तथा अन्य जैविक समुदाय से परस्पर सम्बन्ध होता है, इसी पारस्परिक सम्बन्ध को पारिस्थितिकी तन्त्र कहते हैं। इसकी रचना जैविक तथा अजैविक संघटकों से होती है। पारिस्थितिकी तन्त्र शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम S.जी. टान्सले द्वारा 1935 में किया गया था। यह खुला तन्त्र होता है तथा विभिन्न प्रकार का हो सकता है।
Q08.निम्नलिखित में से किसे कृत्रिम पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है?
उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।
खाद्य शृंखला के अपरदाहारी स्तर में मिलीपीड, स्प्रिंगटेल, वुडलाइस, गोबर मक्खियां और घोंघा शामिल होते हैं जो मृत या सड़ने वाले पादपों या जन्तुओं से पोषण प्राप्त करते हैं
Q10.निम्नलिखित में से कौन-सा/सी अजैविक नहीं है?
पर्यावरण के तत्वों को जैविक एवं अजैविक दो समूहों में वर्गीकृत किया जाता है। • किसी पारिस्थितिकी तन्त्र में पाये जाने वाले सभी निर्जीव पदार्थ उसके अजैविक घटक कहलाते है। इसमें प्रकाश, वर्षण, तापमान, आर्द्रता एवं जल, अक्षांश, ऊँचाई, उच्चावच आदि शामिल होते हे। • जैविक घटकों के अंतर्गत पौधों, प्राणियों (मानव, जंतु, परजीवी सूक्ष्म जीव आदि) एवं अपघटकों (अम्दस्ज्देी) को शामिल किया जाता है।
Q11.निम्नलिखित में से कौन-सा पारिस्थितिकी तंत्र का एक जैविक घटक है?
उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।
Q12.निम्नलिखित में से कौन-सा पारिस्थितिकी तंत्र का एक अजैविक घटक नहीं है?
उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।
Q13.निम्न में से किसे अजैविक पर्यावरण के एक भाग के रूप में नहीं माना जाता है?
उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।
Q14.निम्नलिखित में से कौन सा पारितंत्र का अजैव घटक नहीं है
उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।
Q15.निम्नलिखित में से कौन से अजैव घटक हैं? घ्. चट्टान II. पौधे III. मिट्टी
उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।
Q16.सूर्य का प्रकाश परिवेश का कौन सा घटक बनता है?
उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।
Q17.निम्न में से अजैव घटक कौन नहीं हैे? घ्. पौधे II. जंतु III. जल
उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।
Q18.आस-पास के वातावरण में पशुओं और पौधों के संबन्ध के अध्ययन को क्या कहते हैं?
पारिस्थितिकी जीव विज्ञान की एक शाखा है। जिसमें जीव समुदायों का उसके वातावरण के साथ पारस्परिक संबधों का अध्ययन करते हैं। प्रत्येक जन्तु या वनस्पति एक निश्चित वातावरण में रहता है। पारिस्थितिकी शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग अर्नेस्ट हेकेल ने किया था।
Q19.एक सीमित क्षेत्र है, जहाँ स्थल, जल एवं हवा एक साथ मिलते हैं, जिसमें सभी प्रकार के जीव पाए जाते हैं?
उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।
Q20.निम्नलिखित में से कौन सौर ऊर्जा के सबसे बड़े तयकर्ता हैं?
पृथ्वी पर ऊर्जा का मुख्य स्रोत सूर्य है जिसके द्वारा विकिरण ऊर्जा प्राप्त होती है। हरे पौधे इस ऊर्जा को प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं। इस प्रकार हरे पौधे सौर ऊर्जा के सबसे बड़े स्थिरीकारक/तयकर्ता हैं। अन्य जीवधारी इन्हीं पौधों को भोजन के रूप में ग्रहण करके उनसे ऊर्जा प्राप्त करते हैं।