Q.कोशिकाओं में उपापचय की क्रिया कहाँ होती है?
Correct answer: माइटोकॉड्रिया
Explanation
माइटोकाण्ड्रिया की खोज अल्टमान नामक वैज्ञानिक ने 1890 ई. में की थी। यह कोशिका द्रव्य में पायी जाने वाली बहुत महत्चपूर्ण रचना है। जो कोशिका द्रव्य में बिखरी रहती है। अल्टमान ने इसे बायोप्लास्टर तथा बेण्डा ने माइटोकॉण्ड्रिया नाम दिया इसका आकार और आकृति परिवर्तनशील होता है। यह कोशिका द्रव्य में कणों, सूत्रों, छडों और गोलकों के रूप में बिखरा रहता है। प्रत्येक माइटोकॉण्ड्रिया एक बाहरी झिल्ली एवं एक अत: झिल्ली के चारो ओर घिरी रहती हैं तथा इसके बीच में एक तरल युक्त गुहा होती है। माइटोकॉण्ड्रिया को ऊर्जा उत्पन्न करने के कारण कोशिका का ऊर्जा गृह कहा जाता है। क्योकि 36 ATP अणु जो कि एक ग्लूकोज अणु के टूटने से बनते है। उनमें से 34 ATP (क्रेब्स चक्र के दौरान) माइटोकाण्ड्रिया में ही बनते है।
माइटोकाण्ड्रिया की खोज अल्टमान नामक वैज्ञानिक ने 1890 ई. में की थी। यह कोशिका द्रव्य में पायी जाने वाली बहुत महत्चपूर्ण रचना है। जो कोशिका द्रव्य में बिखरी रहती है। अल्टमान ने इसे बायोप्लास्टर तथा बेण्डा ने माइटोकॉण्ड्रिया नाम दिया इसका आकार और आकृति परिवर्तनशील होता है। यह कोशिका द्रव्य में कणों, सूत्रों, छडों और गोलकों के रूप में बिखरा रहता है। प्रत्येक माइटोकॉण्ड्रिया एक बाहरी झिल्ली एवं एक अत: झिल्ली के चारो ओर घिरी रहती हैं तथा इसके बीच में एक तरल युक्त गुहा होती है। माइटोकॉण्ड्रिया को ऊर्जा उत्पन्न करने के कारण कोशिका का ऊर्जा गृह कहा जाता है। क्योकि 36 ATP अणु जो कि एक ग्लूकोज अणु के टूटने से बनते है। उनमें से 34 ATP (क्रेब्स चक्र के दौरान) माइटोकाण्ड्रिया में ही बनते है।