Q.आम तौर पर, वृहत् ज्वार-भाटा और लघु ज्वार-भाटा के बीच______दिन का अंतराल होता है।
Correct answer: सात
Explanation
सामान्यत: एक वृहद् ज्वार-भाटा और एक लघु ज्वार- भाटा के बीच सात दिन का अन्तराल होता है। समुद्री जलस्तर के ऊपर उठने को ‘ज्वार’ तथा नीचे गिरने को ‘भाटा’ कहा जाता है। समुद्री सतह पर इनकी उत्पत्ति सूर्य व चन्द्रमा के आकर्षण बल तथा पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल व अपकेन्द्रीय बल के प्रभाव से होती है। • अमावस्या और पूर्णिमा के दिन सूर्य, चन्द्रमा तथा पृथ्वी तीनो के एक सीध में होने से इन तीनो का संयुक्त प्रभाव पड़ ता है जिस कारण ‘दीर्घ/वृहद’ ज्वार-भाटा उत्पन्न होता है जो कि सामान्य ज्वार से 20% अधिक ऊंचा होता है। जबकि शुक्ल या कृष्ण पक्ष की सप्तमी या अष्टमी को सूर्य, चन्द्रमा तथा पृथ्वी समकोण बनाते है जिससे महासागरीय जल पर भिन्न-भिन्न दिशाओं में आकर्षण उत्पन्न होता है जिससे ‘लघु ज्वार-भाटा’ की उत्पत्ति होती है जो कि सामान्य ज्वार-भाटा से 20% कम ऊंचा होता है।
सामान्यत: एक वृहद् ज्वार-भाटा और एक लघु ज्वार- भाटा के बीच सात दिन का अन्तराल होता है। समुद्री जलस्तर के ऊपर उठने को ‘ज्वार’ तथा नीचे गिरने को ‘भाटा’ कहा जाता है। समुद्री सतह पर इनकी उत्पत्ति सूर्य व चन्द्रमा के आकर्षण बल तथा पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल व अपकेन्द्रीय बल के प्रभाव से होती है। • अमावस्या और पूर्णिमा के दिन सूर्य, चन्द्रमा तथा पृथ्वी तीनो के एक सीध में होने से इन तीनो का संयुक्त प्रभाव पड़ ता है जिस कारण ‘दीर्घ/वृहद’ ज्वार-भाटा उत्पन्न होता है जो कि सामान्य ज्वार से 20% अधिक ऊंचा होता है। जबकि शुक्ल या कृष्ण पक्ष की सप्तमी या अष्टमी को सूर्य, चन्द्रमा तथा पृथ्वी समकोण बनाते है जिससे महासागरीय जल पर भिन्न-भिन्न दिशाओं में आकर्षण उत्पन्न होता है जिससे ‘लघु ज्वार-भाटा’ की उत्पत्ति होती है जो कि सामान्य ज्वार-भाटा से 20% कम ऊंचा होता है।