Q126.“बहुत दिनन थें मैं प्रीतम पाये, भाग बड़े घरि बैठे आये।। मंगलाचार माँहि मन राखौं, राम रसाँडण रसना चार्षों। मंदिर माँहि भयो उजियारा, ले सुतो अपना पीव पियारा।। ः मैं रनि राती जे निधि पाई, हमहिं कहाँ यह तुमहि बड़ाई। कहै कबीर मैं कछु न कीन्हा, सखी सुहाग राम मोहि दीन्हा ।।” प्रस्तुत पद की व्याख्या के संदर्भ में असंगत है
Correct answer: 'कहै कबीर मैं कछु न कीन्हा, सखी सुहाग राम मोहि दीन्हा' पंक्ति में अपहनुति अलंकार ः