Q72.हीन भएँ जल मीन अधीन कहा कछु मो अकुलानि समानै । । नीर-सनेही कों लाय कलंक निरास है कायर त्यागत प्रानै ।। प्रीति की रीति सु क्यों समुझे जड़ मीत के पानि परें कों प्रमानै। या मन की जु दसा घनआनंद जीव की जीवनि जान ही जानै।। ; छन्द की व्याख्या के संबंध में असंगत है
Correct answer: मीन और विरही की व्याकुलता पूर्णतः सदृश है और दोनों ही वियोग में निराश होकर कायरों की भाँति प्राण हा देते हैं।